असम सरकार ने मादक द्रव्य विरोधी दस्ते (anti-narcotics squad) के वर्तमान स्वरूप को भंग करने के आदेश दिए हैं।  वहीं एसपी को छोड़कर दस्ते के सभी सदस्यों को जिले से बाहर स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है। बता दें कि ये निर्णय अतिरिक्त मुख्य सचिव पबन कुमार बोरठाकुर (Paban Kumar Borthakur) की एक जांच समिति की सिफारिशों पर लिया गया है। 

पिछले महीने नागांव जिले में गोलीबारी की घटना में एक पूर्व छात्र नेता (Kirti Kamal Bora firing case) घायल हो गया था। पुलिस ने दावा किया था कि नागांव कॉलेज के पूर्व महासचिव कीर्ति कमल बोरा मादक पदार्थ बेच रहा था और उसने 22 जनवरी की रात को पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसके बाद उसे पैर में गोली मारी गयी। हालांकि, छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेन्ट्स यूनियन (आसू) (Aasu) ने आरोप लगाया था कि नशे में धुत पुलिसकर्मी एक युवक की पिटाई कर रहे थे और वे बोरा के प्रदर्शन के बाद नाराज हो गए थे।

इसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। ऐसे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma ) ने घटना की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया। गृह विभाग ने डीजीपी को आरोपी सब-इंस्पेक्टर प्रदीप बनिया को निलंबित करने का आदेश दिया। वहीं मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दो मामलों को सीआईडी (CID) को स्थानांतरित करने के लिए भी कहा है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने बोरठाकुर की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और उनकी सिफारिशों के आधार पर गृह और राजनीतिक विभाग ने डीजीपी को गोलीबारी की घटना के संबंध में कई कदम उठाने का निर्देश दिया है।  इसके अलावा डीजीपी को घटना में शामिल दस्ते के प्रत्येक पुलिस अधिकारी द्वारा निभाई गई भूमिका के संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा विभागीय जांच करने के लिए कहा गया है।