असम के कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। रिपुन बोरा ने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले सात साल के शासनकाल में बढ़ती बेरोजगारी और परचेसिंग पावर कम होने से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। राज्यसभा सांसद बोरा ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि बेरोजगारी की दर शहरों और कस्बों में 9.3 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 6.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने दावा किया कि साल 2021 के पहले छह माह में 2।5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपनी नौकरी खो दी, जबकि अतिरिक्त 7।5 करोड़ नागरिक गरीबी रेखा में पहुंचे हैं। 10 करोड़ मध्यम वर्ग के नागरिकों की इनकम आधी हो गई है। असम के पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत तरीके से की गई नोटबंदी और जीएसटी उपायों की वजह से, लगभग 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरी खो दी। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके खराब ढंग से लागू किये गये दीर्घकालिक लॉकडाउन के कारण लगभग दो करोड़ लोग बेरोजगार हो गये।’’

रिपुन बोरा ने दावा किया कि आरटीआई आवेदनों के जरिए इकठ्ठा किए गए फैक्ट्स के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSU) का फायदा साल 2014 में 88,000 करोड़ रुपये था जो कि 2021 में घटकर 26,104 करोड़ रुपये रह गया। बोरा ने कहा, “खराब अर्थशास्त्र और प्रशासन के तहत, भाजपा सरकार ने साल 2019 में रिजर्व बैंक को धमकाया। इसके साथ 1.76 लाख करोड़ रुपये जुलाई 2020 से मार्च 2021 के बीच 99,122 करोड़ रुपये की राशि निकालने का आसान रास्ता चुना। ये देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।’’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि साल 2013-14 में देश पर 56 लाख करोड़ रुपये का विदेशी कर्ज था जो कि साल 2021 में 135 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।‘सीएमआईई और सीएजी के खुलासे के अनुसार ये एक खतरनाक स्थिति है।’’ बोरा ने कहा कि वर्ष 2020 के वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) में 107 देशों के बीच भारत का 94वां स्थान था जबकि नेपाल 73वें, पाकिस्तान 88वें और बांग्लादेश 75वें स्थान पर था।