असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के माध्यम से राज्य के विकास पर जोर देते हुए शनिवार को इन क्षेत्रों में कई योजनाओं की घोषणा की तथा असम समझौते के खंड 6 को लागू करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। 

सोनोवाल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यहां जजेज फील्ड में आयोजित मुख्य समारोह में तिरंगा फहराने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि असम समझौते से राज्य के लोगों को संवैधानिक सुरक्षा मिलती है। उन्होंने कृषि क्षेत्रों के लिए 11 योजनाओं की घोषणा की और कहा कि उनकी सरकार कृषि के विकास के जरिये ‘आत्मनिर्भर असम’ के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन अवधि के दौरान कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े किसानों और अन्य लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य से उत्पादन न केवल राज्य के बाहर भेजा गया बल्कि दुबई जैसे विदेशी गंतव्य पर भी आपूर्ति की गयी। 

सोनोवाल की ओर से घोषित की गई योजनाओं में धेमाजी और बक्सा जिलों को मिलाकर ‘चावल क्लस्टर’ का गठन, सरकारी खरीद के माध्यम से धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करना, सभी जिलों में कोल्ड स्टोरेज, धान प्रसंस्करण मिलों की स्थापना के लिए सरकारी सब्सिडी और बाजारों में उपज को आसानी से लाने या ले जाने के लिए किसानों को मिनी ट्रकों का वितरण शामिल है।  

सोनोवाल ने विश्वनाथ जिले में ‘जैविक कृषि के लिए उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना की भी घोषणा की। उन्होंने डेयरी, चारा उत्पादन, मसालों की खेती और मत्स्य क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष पहल करने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से निपटने के अलावा राज्य कटाव, भूस्खलन, अफ्रीकी स्वाइन फ्लू, जापानी एन्सेफलाइटिस और बगजान में तेल कुंएं में विस्फोट जैसी समस्याओं से भी लड़ रहा है। उन्होंने कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य को तैयार करने में अह्म भूमिका के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों तथा मीडियाकर्मियों सहित सभी कोरोना अग्रिम पंक्ति योद्धाओं के प्रयासों की प्रशंसा की। 

सोनोवाल ने असम समझौते के खंड 6 समिति की रिपोर्ट के कार्यान्वयन की चर्चा करते हुए कहा कि कोरोना महामारी ने चीजों को धीमा कर दिया है, लेकिन उन्होंने केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार की असम समझौते को लागू करने की प्रतिबद्धता को दोहराया जो असमिया लोगों के राजनीतिक, सांस्कृतिक, भाषाई और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की व्यवस्था सुनिश्चित करता है। मुख्यमंत्री ने बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने सहित भारत-बंगलादेश सीमा को सील करने के साथ-साथ राज्य में शांति स्थापित करने समेत विभिन्न उपायों की भी चर्चा की।