असम-मिजोरम सीमा पर हिंसा के बाद हिमंता बिस्व सरमा ने आरोप लगाया कि मिजोरम रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में कब्जा करने की कोशिश कर रहा है जिसे वह नहीं होने देंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मिजोरम के सीएम जोरामथांगा ने उनसे माफी मांगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिमंता बिस्व सरमा ने कहा, जब फायरिंग हो रही थी, मैंने मिजोरम के मुख्यमंत्री को छह बार कॉल किया। उन्होंने सॉरी कहा और मुझे बातचीत के लिए आइजोल बुलाया। कोई भी हमारी जमीन का एक इंच नहीं ले सकता है। हम अपने क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बॉर्डर पर पुलिस तैनात है।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा, यह राजनैतिक मुद्दा नहीं है। यह दो राज्यों के बीच सीमा विवाद है जो काफी लंबे समय से चला आ रहा है। इस तरह का विवाद तब भी हुआ है जब दोनों तरफ कांग्रेस की सरकार थी। यह दो राज्यों के बीच विवाद है न कि दो राजनैतिक दलों के बीच। हिंसा की वजह पर हिमंता बिस्व शर्मा ने बताया, यहां एक रिजर्व फॉरेस्ट है। क्या रिजर्व फॉरेस्ट का इस्तेमाल आबादी के बसने के लिए किया जा सकता है? विवाद जमीन को लेकर नहीं है, जंगल को लेकर है। असम जंगल को संरक्षित करना चाहता है। हिमंता ने आगे बताया, हम वन क्षेत्र में कोई आबादी नहीं बसाना चाहते। सैटलाइट इमेज की मदद से आप देखते हैं कि वहां कितना अतिक्रमण हुआ है। असम सरकार ने भी इस पर एक (कानून) मुकदमे के साथ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।

मिजोरम के साथ सीमा हिंसा में मारे गए प्रत्येक पुलिस जवान के परिवार को असम सरकार 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद देगी। प्रत्येक घायल को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा असम सरकार ने घायल एसपी को इलाज के लिए मुंबई भेजा है। मिजोरम के सीएम जोरामथांगा ने आरोप लगाया, करीब 200 असम पुलिसकर्मी बॉर्डर पार करके आए और मिजोरम की तरफ सीआरपीएफ पोस्ट को रौंद दिया। असम की तरफ से फायरिंग की शुरुआत हुई। उन्होंने ग्रेनेड फेंके और मशीन गन का इस्तेमाल किया।