गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पूर्वोत्तर राज्यों में कुशल राजनीतिक कौशल के लिए जाने जाते हैं और अब की बार वह महाराष्ट्र की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। शिवसेना के बागी विधायक फिलहाल अपने लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप गुवाहाटी में रूके हैं और मुख्यमंत्री सरमा एक बार फिर से भाजपा के संकट के इस समय में एक उचित प्रबंधक के रूप में सुर्खियां बटोर रहे हैं। शिवसेना के ये विधायक महाराष्ट्र से सबसे पहले सूरत में गए और वहां से गुवाहाटी के लिए अपना सफर तय किया। ऐसा माना जा रहा है कि शिवसेना विधायकों का इस तरह से अचानक गुवाहाटी पहुंचना एक पूर्व नियोजित योजना थी, जहां साल 2016 से भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सत्ता में है। 

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इनके पहुंचने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए और एयरपोर्ट पर सरमा के दो भरोसेमंद भाजपा नेता सुशांत बोरगोहेन और पल्लब लोचन दास ने इनका स्वागत किया। इसके बाद इन्हें असम सरकार के चार कैबिनेट मंत्रियों के साथ बस में बिठाकर होटल ले जाया गया, जहां इन्हीं कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में ये ठहरे हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विधायकों के रेडिसन ब्लू होटल में पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री सरमा यहां नजर आए थे। इसके बाद वह दोबारा दोपहर के समय होटल परिसर में उपस्थित नजर आए। इससे यह पता चलता है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, साल 2015 में कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने बाद श्री सरमा ने मणिपुर (2017) और मेघालय (2018) में हुए विधानसभा चुनावों के उपरांत इन दोनों ही राज्यों में त्रिशंकु जनादेश आने के बाद पार्टी में अपने सहयोगियों के साथ सरकार बनाने में एक अहम भूमिका निभाई है। 

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वह 2018 के त्रिपुरा चुनावों में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार भी थे, जहां पार्टी ने माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के 25 साल के निर्बाध शासन को समाप्त करते हुए आश्चर्यजनक रूप से निर्णायक जीत हासिल की थी। कई लोगों का मानना ??है कि संकटपूर्ण परिस्थितियों में पार्टी के लिए उनकी सेवाओं के कारण ही भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले साल असम में भाजपा की सरकार आने के बाद विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की जगह श्री सरमा को मुख्यमंत्री के पद पर बिठाया। हालांकि, भाजपा में भले ही उनका कद काफी ऊंचा हो, लेकिन जब उनके अपना राज्य बाढ़ की भीषण समस्या से जूझ रहा है, ऐसी परिस्थिति में दूर-दराज के महाराष्ट्र की राजनीतिक संकट में उलझने के लिए विपक्ष में उनकी आलोचनाएं हो रही हैं। असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कहा,''मुख्यमंत्री को अपना काम खुद करना चाहिए और राज्य में बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान करना चाहिए। उनके पास बाद में राजनीति करने के लिए काफी समय है।'

असम जातीय परिषद (एजेपी) ने महाराष्ट्र के विधायकों की मेजबानी करने और संभवत: वहां सरकार गिराने के लिए सरमा की आलोचना की। एजेपी ने एक बयान में कहा, 'यह दुखद है कि महाराष्ट्र में सियासी खेल का असम केंद्र बन गया है। यह राज्य के 55 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति असंवेदनशीलता का प्रदर्शन है।'