असम से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक शख्स की उम्र ही वैक्सीनेशन स्लॉट खोजने में उसकी सबसे बड़ी बाधा बन गई। दरअसल दिगंता कुर्मी नाम का ये शख्स 10 जून को अपने चाय बागान अस्पताल में कोविड-19 वैक्सीन का पहला इंजेक्शन लेने गया था। यह दूसरी बार था जब कुर्मी अपने पहले टीकाकरण के लिए गए। इसस पहले वह ऊपरी असम में गोलाघाट जिले के कूमताई मॉडल अस्पताल में भी गए थे लेकिन वहां उन्हें वैक्सीन नहीं दी गई। मॉडल अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें टीका लगाने से इनकार कर दिया था क्योंकि आधिकारिक तौर पर वह अभी 45 साल के नहीं थे।

दरअसल ये वैक्सीनेशन 45 साल से ऊपर वालों को दी जा रही थी और अधिकारियों के मुताबिक कुर्मी इस स्लॉट में फिट नहीं बैठ रहे थे क्योंकि उनकी उम्र 44 साल 7 महीने थी। वहीं दूसरी बार जब वह 18-44 साल की उम्र वालों के स्लॉट के लिए गए तो उन्हें वहां भी वैक्सीन देने से इनकार कर दिया गया। वजह थी उनकी 44 साल ऊपर की उम्र। रिपोर्ट के मुताबिक दिगंता कुर्मी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ”मेरे दो बच्चे हैं और अगर मैं खुद का टीकाकरण नहीं करवा पा रही हूं तो मैं असुरक्षित हूं। उम्र मेरी गलती नहीं है और मेरा मानना ​​है कि इसके लिए मुझे अधर में नहीं रहना चाहिए।”

राज्य के सबसे बड़े चाय बागानों में से एक, कूमताई की आबादी लगभग 17,500 है। इसमें बागान के 5,800 कर्मचारी शामिल हैं। 11 नवंबर तक, 323 श्रमिकों को टीके की पहली खुराक दी गई थी, उनमें से 11 ने अपनी दूसरी खुराक भी ले ली है। 11 जून तक यहां से11 पॉजिटिव सामने आ चुके हैं जबकि एक शख्स की मौत हो गई है। जब सारे विकल्प बंद हो गए तो आखिर में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया और मुख्यमंत्री को ट्वीट भी किया गया। ट्वीट में लिखा गया, “44 साल 7 महीने की उम्र 45 साल से कम और 44 साल से ऊपर है। हमने टीम को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन उन्होंने कहा कि वे प्रोटोकॉल नहीं तोड़ पाएंगे।”

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने इस पर तुरंत रिएक्शन दिया और बताय कि जिला परियोजना प्रबंधक गोलाघाट ने दिगंता कुर्मी को टीका लगाने का आश्वासन दिया है। दिगंता को इस संबंध में एक कॉल आया और जल्द ही उनके टीकाकरण की पुष्टि की गई।