गुवाहाटी। असम (Assam) के हैलाकांडी जिले में 65 वर्षीय मजदूर ने खुद की भारतीय पहचान साबित करने की इच्छा लिए हुए ही दुनिया छोड़ दी। 65 वर्षीय सुकदेव री को अपनी पहचान न साबित कर पाने के चलते विदेशी नागरिक घोषित किया गया था। लेकिन गुवाहाटी उच्च न्यायालय (Guwahati High Court) ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को अधूरा पाया।

हाई कोर्ट ने हैलाकांडी फॉरेनर्स् ट्रिब्यूनल को 3 दिसम्बर 2021 को मामले की फिर से सुनवाई करने को कहा था लेकिन उसके पहले ही शुक्रवार को कार्डियक अरेस्ट के कारण री की मृत्यु हो गई।

इसी तरह पिछली साल दिसम्बर में 104 वर्षीय चंद्रधर दास की भी भारतीय पहचान साबित करने से पहले ही मौत हो गई थी। दास 1956 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आए थे।

सुकदेव री हैलाकांडी जिले के अलगापुर विधानसभा क्षेत्र के मोहनपुर गांव के रहने वाले थे। दो साल या उससे अधिक कारावास की सजा काट चुके कैदियों को रिहा करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सलाह के आधार पर उन्हें पिछले साल 26 फरवरी को डिटेंशन कैंप से रिहा किया गया था। 

चाय बागान में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाले सुकदेव री के खिलाफ 2012 में एक मामला दर्ज किया गया था। 24 जून 2016 को गिरफ्तारी से पहले वह कई बार अदालत में पेश हुए थे।

कई मौकों पर अदालत के सामने पेश न होने पर ट्रिब्यूनल कोर्ट ने एकतरफा फैसले में सुकदेव री को 25.03.1971 के बाद की धारा का विदेशी घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा "याचिकाकर्ता विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 9 के तहत अपने ऊपर डाले गए बोझ का निर्वहन करने में विफल रहा।"

हाल ही में सुकदेव री के वकील ने ट्रिब्यूनल कोर्ट (tribunal court) के आदेश को गुवाहाटी हाईकोर्ट (Guwahati High Court) में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति कोटेश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मालाश्री नंदी ने 3 नवम्बर को सुकदेव री के मामले को फिर से खोलने की याचिका पर सुनवाई के बाद पाया कि री को अपने दस्तावेज पेश करने का एक और मौका मिलना चाहिए था।