बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान को लिखा था। डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन् 1891 में मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। बाबा साहेब ने अपना सारा जीवन हिंदू धर्म की चतुर्वण प्रणाली और जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष में बिता दिया।

उन्होंने दलितों और पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। हमेशा हर जंग में उनके खड़े रहे। इसी मकसद से उन्होंने 31 जनवरी 1920 को मूकनायक नाम का अखबार शुरू किया था। उनकी 129 जयंती पर जानते हैं उनके कुछ

विचार-
1. जीवन लम्बा नहीं महान होना चाहिए।
2. धर्म ऐसा जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
3. यदि भारत को संयुक्त एकीकृत आधुनिक बनाना है तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए। 
4. हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए नहीं कोई गुंजाइश
5. नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष में जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है।
6. बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य है।
7. समानता एक कल्पना मान सकते है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
8. यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा- अंबेडकर
9. आप खुद सामाजिक स्वतंत्रता हासिल नहीं कर लेते तो कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है।
10. निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल न लगाया गया हो।