असम में कोरोना बहुत ही ज्यादा बढ़ रहा है। वैसे तो पूरे 72 लाख से ज्यादा लोग कोरोना के शिकार हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण के डर केंद्र सरकार स्कूल कॉलेज सभी बंद करवा दिए थे। लेकिन कोरोना क नियंत्रण करने के बाद  15 अक्टूबर से फिर से स्कूल और कॉलेज खोलने की अनुमति दे दी है। इसी तरह से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और राज्य के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नवंबर में सभी राज्य संचालित मदरसों को बंद करने के बारे में एक अधिसूचना जारी की जाएगी।

इन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 100 संस्कृत स्कूल भी बंद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी राज्य संचालित मदरसों को नियमित स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा या कुछ मामलों में शिक्षकों को राज्य संचालित स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा और मदरसों को बंद कर दिया जाएगा। इसके लिए नवंबर में एक अधिसूचना जारी की जाएगी। मदरसे शैक्षिक संस्थान हैं जहां कुरान और इस्लामी कानून को गणित, व्याकरण, कविता और इतिहास के साथ पढ़ाया जाता है।

जानकारी के लिए शैक्षणिक और शोध वेबसाइट द कन्वर्सेशन पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की रिपोर्ट है कि 4 प्रतिशत मुस्लिम छात्र देश के मदरसों में पढ़ते हैं। बीजेपी की अगुवाई वाली असम सरकार ने धार्मिक संस्थानों पर पैसा खर्च नहीं करने के लिए, मदरसों को नियमित स्कूलों में बदलने या शिक्षकों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने और उन्हें बंद करने का निर्णय लिया है। मंत्री हिमंता ने कहा कि मेरी राय में, कुरान का शिक्षण सरकारी धन की कीमत पर नहीं हो सकता है। अगर हमें ऐसा करना है तो हमें बाइबल और भगवद गीता दोनों को भी सिखाना चाहिए।