असम जातीय परिषद (अजप) ने बुधवार को कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जैसी सरकारी एजेंसियों की ओर से धान की कम खरीद किए जाने के विरोध में पार्टी पूरे प्रदेश में ‘सत्याग्रह’ करेगी।

अजप के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई ने यहां संवाददाता सम्मेलन में एफसीआई की आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी एजेंसी ने धान की कम खरीद कर कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को मंझधार में छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां एफसीआई में नया महाप्रबंधक आने के बाद से पिछले वर्षों की तुलना में धान की खरीद में महत्वपूर्ण कमी आई है। राज्य सरकार की एजेंसी भी इस समय धान की खरीद नहीं कर रही हैं। जब कोविड महामारी के कारण किसान पहले से ही संकट में हैं, तब उनपर यह दोहरी मार है।’’

उल्लेखनीय है कि एफसीआई के असम क्षेत्र के नए महाप्रबंधक ने पिछले महीने कार्यभार संभाला था।

गोगोई ने कहा, ‘‘स्थानीय स्तर पर धान की खरीद करने के बदले, एफसीआई ने असम को 24 लाख मीट्रिक टन धान की आपूर्ति की है और राज्य सरकार ने केवल इसकी ढुलाई के लिए 1500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि यह असम के चावल की किस्म को नष्ट करने तथा बाहर से हाइब्रिड बीज मंगाने की सोची समझी और गहरी साजिश है।