बिहार विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन कांग्रेस की गठबंधन की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनाव परिणाम से कांग्रेस की गठबंधन के सहयोगियों के साथ मोलतोल करने की क्षमता कम हुई है। इसका असर पश्चिम बंगाल, असम और अन्य प्रदेशों में पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस एक बार फिर वामदलों के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। 

इससे पहले दोनों ने साल 2016 में मिलकर लड़ा था। इन चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन वामदलों से बेहतर रहा था। पर बिहार में वामदलों का प्रदर्शन कांग्रेस से बेहतर रहा है। इसलिए वामदल इस बार कांग्रेस को कम सीट देने की कोशिश करेंगे। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 92 सीट पर चुनाव लड़ा था और 44 सीट जीती थी। वहीं, वामदलों ने 200 से ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में वामदल सिर्फ 33 सीट जीत सकी थी। ऐसे में कांग्रेस का जीतने का प्रतिशत 50 फीसदी और वामदलों की जीत का प्रतिशत सिर्फ 16.17 फीसदी था। 

असम में भी कांग्रेस इस बार गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ वामदलों का भी गठबंधन की तैयारी कर रही है। ऐसे में असम में भी पार्टी को सहयोगियों के साथ तालमेल करने में मुश्किल हो सकती है। तमिलनाडु में भी कांग्रेस डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है। 

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बिहार चुनाव के बाद हालात में बदलाव आया है। डीएमके कई चुनावों से कांग्रेस को कम सीट देने का दबाव बनाती रही है। इस बार डीएमके का रुख और आक्रामक होगा। ऐसे में बिहार चुनाव के बाद बदली परिस्थितियों में डीएमके का दबाव बढ़ जाएगा।