चीन से ब्रह्मपुत्र नदी के जरिए फैले अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएफएस ) से असम में अब तक 2900 पालतू सुअरों की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 48 घंटों में सुअरों के मरने में कमी आई है। असम के छह जिलों के 310 गांवों में एएफएस से शूकर मारे गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि वे अब तक एएफएस के कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं। यह बीमारी पहले कीनिया में 1921 सामने आई थी। इस बार के पहले भारत में एएफएस नहीं हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार की शाम पांच बजे तक राज्य में एएफएस से 2904 शूकर मारे गए थे। ऊपरी असम के छह जिलों के 310 गांवों में सूअर मारे गए हैं। कहा गया है कि 2019 की जनगणना के अनुसार राज्य में 21 लाख घरेलू शूकर है और लगभग सात लाख किसान शूकर के मांस के लिए इनका लालन-पालन करते हैं।

पूर्वोत्तर में सालाना आठ हजार करोड़ रुपए का शूकर के मांस का व्यापार होता है। पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने कहा कि एएफएस को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इसके लिए कोई टीका या दवा नहीं है। इसके चपेट में आने के बाद सूअरों के मरने की दर सौ प्रतिशत है। हम इसे और अधिक नए स्थानों में फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हमने पशुपालन विशेषज्ञ, शूकर पालक और अधिकारियों से मिलकर एक प्लान बनाया है।

केंद्र ने संक्रमित सूअरों को मारने के लिए कहा है, लेकिन हम मारने के बजाए अन्य तरीकों पर सोच रहे हैं। संक्रमित सूअरों के स्थान से एक किलोमीटर दायरे में कटेंनमेंट जोन और 10 किमी दायरे को सर्विलेंस जोन बनाकर आगे बढ़ रहे हैं ताकि बीमारी अन्य में न फैले। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह संक्रमण मनुष्य को प्रभावित नहीं करता, लेकिन मनुष्य कैरियर जरुर बनता है और बिना प्रभावित हुए सूअरों में यह अनजाने में दे देते हैं।