असम के करीमगंज जिले में एक 45 वर्षीय व्यक्ति को 2014 के अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और कोर्ट को यह पता चलने से पहले कि पुलिस ने एक निर्दोष को गिरफ्तार किया है, 16 दिन इस व्यक्ति ने हिरासत में बिताए। हुसैन अहमद को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया और पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

असम के एक व्यक्ति ने ऐसे अपराध के लिए 16 दिन जेल में बिताए, जो उसने किया ही नहीं है था। पुलिस ने भी इस व्यक्ति से माफी मांगी। असम में 2014 में एक लड़की के अपहरण मामले को लेकर एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। जिसमें हुसैन अहमद को गिरफ्तार किया गया था, एक महिला के पिता द्वारा दायर भगाने का मामला था, जो एक पुरुष के साथ भाग गई थी। हालांकि, बाद में लड़की के घरवालों ने शादी को स्वीकार कर लिया लेकिन, एफआईआर वापस लेने की जहमत नहीं उठाई।

करीमगंज के पुलिस अधिकारी श्यामानंद सिन्हा ने कहा, “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और हमने परिवार से माफी मांगी है।” वहीं, हुसैन अहमद ने मीडिया से बात करने से इनकार नहीं किया है। उसके परिवार ने कहा कि वह पूरे मामले से बहुत आहत था और उसे काम नहीं मिल रहा है। लड़के के पिता ने कहा कि अब उनका बेटा जेल से बाहर आ गया है। उसे पुलिस और कोर्ट ने निर्दोष घोषित कर दिया है लेकिन, समाज उसे स्वीकार नहीं करेगा।

लड़का जॉब खोजने की बहुत कोशिश कर रहा है लेकिन, कुछ लोगों ने उसे लेने से इनकार कर दिया है। उसके पिता अलाउद्दीन ने कहा कि गिरफ्तार होने से पहले, हुसैन अहमद एक स्थानीय ट्रैवल एजेंसी के साथ ड्राइवर के रूप में काम करता था। हुसैन अहमद की पत्नी रुशना बेगम ने कहा कि 12 मई को आधी रात उनके घर पर पुलिसकर्मियों की एक टीम आई। परिजन ईद मनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस कर्मी आ गए और उनके पति को लेकर चले गए।

हुसैन अहमद की पत्नी रुशना बेगम ने कहा कि कोर्ट द्वारा उसे बरी किए जाने के बाद पुलिस ने परिवार से माफी मांगी थी। लेकिन इससे हमें पिछले दो हफ्तों के आघात को भूलने में मदद नहीं मिलेगी।

वहीं, पुलिस अधिकारी श्यामानंद सिन्हा ने कहा कि यह इसलिए हुआ क्योंकि संदिग्ध और हुसैन अहमद का न केवल एक ही नाम था बल्कि उनके पिता का भी एक ही नाम था। जब पुलिस घर गई, तो उन्होंने हमें कोई अन्य दस्तावेज भी नहीं दिखाया। पुलिस वारंट के अनुसार अपना कर्तव्य निभा रही थी।