गुवाहाटी । चार उग्रवादी संगठनों के 64 सदस्यों ने सोमवार को मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस मौके पर हिंसा का मार्ग छोड़ शांति का रास्ता अपनाने वाले उग्रवादी संगठनों के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए सोनोवाल ने कहा कि बिना शांति के विकास संभव नहीं है। अपने मन में घृणा और भेदभाव की भावना रखकर कोई भी शांति से नहीं जी सकता।

इसलिए अपने परिवार, समाज और राज्य को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का मार्ग छोड़ शांति के मार्ग पर चलना ही होगा। राज्य सरकार के गृह विभाग तथा असम पुलिस के तत्वावधान में श्रीमंत शंकरदेव अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षागृह में आत्मसमर्पण करने वालों में अल्फा (स्वाधीन) के स्वघोषित उप-मुख्य सेनाध्यक्ष मनोज राभा उर्फ दृष्टि राजखोवा, उसकी पत्नी लीला डी मराक, विजय दास उर्फ मिंट्‌ सशरकिया सहित संगठन के 17 सदस्य शामिल हैं। 

इसके अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लांग्पी (पीडीसीपी) के स्वघोषित मुख्य सेनाध्यक्ष ओन टेरन उर्फ लखन टेरन, यूनाइटेड पिपुल्स रिवल्यूशनरी फ्रांट (यूपीआरएफ) के स्वघोषित महासचिव लालमिनथांग गुइटे उर्फ फ्रेंकी, स्वघोषित रक्षा सचिव सिनथामसेन गुइटे सहित उक्त संगठनों

के 32 सदस्य सहित डिमासा नेशनल लिवरेशन आर्मी (डीएनएलए) के स्वघोषित प्रचार सचिव रिपेंच गर्लासा सहित 13 सदस्य अपने-अपने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हुए। 

मुख्यधारा में शामिल होने वाले युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा कि हमें देश को ध्वस्त नहीं सृजन के लिए कोशिशें करनी होंगी। उन्होंने अभी भी जंगलों में भटक रहे उग्रवादी संगठनों के सभी सदस्यों से मुख्यधारा में लौट आने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग सिर्फ पतन को ही आमंत्रित करता है। 

ऐसे सभी युवाओं से राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने की अपील करते हुए. मुख्यमंत्री ने कहा आप भी अंधकारमय जीवन को छोड़कर अपने आलोकमय जीवन में लौट आएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आस्था और विश्वास का माहौल बना है। इस वजह से विभिन्‍न उग्रवादी संगठनों के अधिकाशं युवा अपने हथियार त्याग कर मुख्यधारा में शामिल होने लगे हैं। इस मौके पर राज्य के मुख्य सचिव जिष्णु बरुवा, पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार हृषिकेश गोस्वामी, मुख्यमंत्री के विधि सलाहकार शांतनु भराली, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार बरठाकुर, गृह विभाग के प्रधान सचिव नीरज बर्मा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हरमित सिंह, गृह विभाग के आयुक्त सचिव जीडी त्रिपाठी, सेना की 12वीं माउटेंट डिविजन के जीओसी एसपी सिंह, सीआरपीएफ के नार्थइस्ट जोन के अतिरिक्त महानिदेशक संजीव रंजन उजा सहित बड़ी संख्या में सैन्य व नागारिक अधिकारी, आत्मसमर्पण करने वालों के परिवार के सदस्य तथा डिमा हस्ताउ जिले के गांवबुढ़ा और वरिष्ठ नागरिकों ने शिकरत की।