असम में 13 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। ये सभी ये प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के सदस्य बताए जा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में सीपीआई-एम नेता अरुण कुमार भट्टाचार्य उर्फ 'कंचन दा' को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक ये सभी लोग उन्हीं के समर्थक बताए जा रहे हैं। इन लोगों ने डिब्रूगढ़ और कछार जिलों में आत्मसमर्पण किया है। 

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कंचन दा की गिरफ्तारी असम पुलिस ने बीती 6 मार्च को कछार जिले में की थी। विशेष पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने कहा, 'प्रतिबंधित सीपीआई-एम के 13 कार्यकर्ता डिब्रूगढ़ और कछार में हिंसा का रास्ता छोड़कर आज मुख्य धारा में शामिल हो गए। वे सीपीआई-एम नेता अरुण कुमार भट्टाचार्जी उर्फ कंचन दा के सहयोगी हैं, जिन्हें इस साल की शुरुआत में असम पुलिस ने गिरफ्तार किया था। डिब्रूगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बितुल चेतिया ने इसको लेकर जानकारी दी थी। जिसके मुताबिक माओवादी कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले 9 लोगों ने आत्मसमर्पण के लिए सरकार से संपर्क किया था। जिला पुलिस ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साथ उनके संबंध होने की पुष्टि की थी। एएसपी ने कहा कि उनमें से एक के उग्रवादियों के साथ संबंध होने के बारे में पता था। जबकि दूसरे के बारे में पुलिस रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं थी।

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चेतिया ने कहा था कि भाकपा (माओवादी) के साथ संदिग्ध संबंधों वाले दो अन्य व्यक्तियों को इस महीने की शुरुआत में डिब्रूगढ़ में पकड़ा गया था। साथ ही जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास से एक पिस्तौल, मैगजीन और गोला-बारूद जब्त किया गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि वरिष्ठ नक्सली नेता से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर कुछ सप्ताह पहले ‘कंचन दा’ के साथ संबंध रखने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी कछार में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने 72 साल के ‘कंचन दा’ की गिरफ्तारी के बाद कहा था कि उन्हें असम में भाकपा (माओवादी) की एक राज्य-स्तरीय समिति गठित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके साथ ही पड़ोसी देश की ओर से कंचन दा को माओवाद से प्रभावित राज्य जैसे झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों में एक ‘लाल गलियारा’ बनाने का काम सौंपा गया था।