असम में अधिकारी और कर्मचारी महामारी से जुड़े काम में व्यस्त हैं। ऐसे में वे एनआरसी से बाहर निकाले जाने के वास्तविक कारणों को बताने वाले आदेश की फिर से जांच नहीं कर सकते।

अस्वीकृति आदेश जारी करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होनी थी, लेकिन अब महामारी के थमने की प्रतीक्षा करनी होगी।यह बताते हुए कि बाहर निकाले गए हर व्यक्ति को अस्वीकृति आदेश जारी किया जाना है, उन्होंने कहा कि इस आदेश को दूसरे आदेश की जरूरत होगी। इस आदेश में अंतिम एनआरसी से निकाले जाने का वास्तविक कारण बताया गया है। अस्वीकृति आदेश संबंधित व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बाद वे फॉरनर्स ट्रिब्यूनल में 120 दिनों के भीतर अपील कर सकेंगे।

एनआरसी को लेकर एक नयी बहस छिड़ती दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट मे एक नयी याचिका दाखिल हुई है जिसमें पूरे देश में एनआरसी लागू करने की मांग की गई है। कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह गैर-कानूनी ढंग से रह रहे विदेशियों के खिलाफ फारनर्स एक्ट में कार्रवाई करे। साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह नागरिकता अधिनियम की धारा 14ए को लागू करते हुए पूरे देश में एनआरसी लागू करे।

यह जनहित याचिका नीरज शंकर सक्सेना सहित कुल सात लोगों ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दाखिल की है। यह भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव की मतदाता सूचियों की समीक्षा करे और उनसे विदेशियों के नाम हटाए।