भारत और चीन के सैनिक लाठी-डंडों और पत्थरों से लड़ते हैं लेकिन गोली नहीं चलती जिसके पीछे एक वजह है। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारतीय सेना का एक अधिकारी और दो शहीद हो गए। इस घटना के बारे में जो शुरुआती जानकारी आ रही है, उसके मुताबिक सीमा पर गोली नहीं चली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने लाठी-डंडों और पत्‍थरों का इस्‍तेमाल किया। ऐसे में सवाल उठता है कि परमाणु हथियारों से संपन्न दो देशों के जवान 14000 फीट की ऊंचाई पर लाठी-डंडों और पत्‍थरों से क्यों लड़ रहे हैं?
आपको बता दें कि भारत-चीन बॉर्डर पर करीब 45 साल बाद किसी सैनिक की जान गई है। साल 1975 में LAC पर आखिर बार चीन के हमले में भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। तब अरुणाचल प्रदेश में चीन ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें चार सैनिक शहीद हुए थे। भारत ने चीन पर बॉर्डर क्रॉस कर हमले का आरोप लगाया था मगर चीन हमेशा की तरह मुकर गया। तबसे लेकर सोमवार तक, बॉर्डर पर झड़प तो कई बार हुई लेकिन किसी की जान नहीं गई थी।
बताया गया है कि दोनों देशों ने यह तय किया है कि सीमा पर अग्रिम चौकियों पर जो भी सैनिक तैनात होंगे, उनके पास या तो हथियार नहीं होंगे। अगर रैंक के मुताबकि अफसरों के पास बंदूक होगी तो उसका मुंह जमीन की तरफ होगा। यही वजह है कि एलएसी पर दोनों तरफ के सैनिक निहत्थे एकदूसरे को अपने इलाके से खदड़ते हैं और हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता है। एलएसी पर तैनात दोनों तरफ के सैनिकों को इसकी खास ट्रेनिंग दी जाती है कि कुछ हो भी हो जाए हथियार का इस्तेमाल नहीं करना है।

गलवान घाटी और पैंगोंग झील, दो मुख्‍य पॉइंट हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। तमाम बातचीत के बाद भी चीन के सैनिक गलवान घाटी से हटने को तैयार नहीं थे। भारतीय सैनिक चीनी जवानों को कल रात पीछे धकेल रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच खूनी झड़प हो गई जिसमें भारतीय सेना का एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए।