अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Pema Khandu का चाहे उनकी आस्था या धर्म कुछ भी हो लेकिन आदिवासी समुदाय के सदस्यों से स्वदेशी रीति-रिवाजों और त्योहारों को संरक्षित करने और उनका पालन करने का आह्वान किया।

माचिस (अरुणाचल आदिवासियों की भाषा में एक शॉल बॉडी पर लपेट कर पहनने को माचिस कहते हैं) और टोपी के साथ न्याशी पारंपरिक पोशाक में सजे खांडू ने अपने सदियों पुराने रीति-रिवाजों के संरक्षण और अभ्यास के लिए न्यिशियों की सराहना की और स्थानीय पुजारियों या न्याबस की अध्यक्षता में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ Golden Jubilee Nyokum का जश्न मनाया।

Pema Khandu ने ट्वीट कर कहा कि सोरी लांगडी, एक विशाल पत्थर का खंभा 'गोल्डन जुबली न्योकुम युलो मेमोरियल कॉम्प्लेक्स', सेप्पा में संरक्षित है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह सदियों से देशी न्याशी समुदाय की भलाई की रक्षा करता है।
उन्होंने बताया कि सोरी का अर्थ है सत्य की शपथ लेना, और लंगड़ी का अर्थ है पत्थर का खंभा जो शपथ ग्रहण का साक्षी है। यह एक सुंदर स्मारक है जो हमारी प्राचीन परंपरा, इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है, और हमारी युवा पीढ़ी के लिए हमारी महान स्वदेशी संस्कृति की गवाही देने के लिए एक महत्वपूर्ण अवशेष है।सोरी लांगडी एक मोनोलिथ स्तंभ के साथ खड़ा है, जिसमें उन लोगों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने सेप्पा में पिछले पचास वर्षों से न्योकुम युलो उत्सव का नेतृत्व किया था।
खांडू ने कहा कि "पूर्वी कामेंग जिले के मुख्यालय सेप्पा में स्वर्ण जयंती न्योकुम समारोह में भाग ले रहे थे। न्योकुम जैसे त्यौहार और उससे जुड़े अनुष्ठान न्यिशियों की पहचान हैं। इसलिए, विभिन्न धर्मों को मानने वालों सहित सभी न्यिशियों को न्योकुम मनाना चाहिए और गर्व से अपनी पहचान बनाए रखना चाहिए, जो वे कर रहे हैं और उनके प्रति मेरा सम्मान है "।यह देखते हुए कि कई लोग शर्ट और पतलून में उत्सव में शामिल हो रहे थे, Pema Khandu ने उनसे कम से कम त्योहारों के दौरान अपने पारंपरिक पोशाक पहनने की अपील की। उन्होंने उनसे त्योहार के मुख्य दिन 26 फरवरी को पारंपरिक पोशाक पहनकर आने का आग्रह किया, जब केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।