भारत और भूटान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी केमेंग जिले के छोटे से गांव ब्रोकसार्थंग के सभी घरों में जल जीवन अभियान के तहत नल से जलापूर्ति कर दी गयी है। यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से बुधवार को दी गई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘वर्ष 2019 तक गांववासी जलापूर्ति की बड़ी कमी से जूझ रहे थे लेकिन जल जीवन मिशन के तहत अरुणाचल प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग ने 2020 में गांव के सभी परिवारों को उपचारित जलापूर्ति उपलब्ध करा दी है।’

ब्रोकसार्थंग गांव मध्य समुद्री स्तर (एमएसएल) से लगभग 2,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां ‘ब्रोकपा‘ समुदाय से संबंधित 170 व्यक्तियों की वर्तमान आबादी के साथ 22 परिवार हैं। ब्रोकपा याक के पालन पोषण एवं खानाबदोश जीवनशैली के लिए विख्यात हैं। यह गांव जिला मुख्यालय बोमडिला से लगभग 76 किमी तथा निकटतम शहर दिरांग से 36 किमी की दूरी पर है। मंत्रालय ने बताया कि यह योजना पाइप्ड ग्रेविटी सिस्टम पर आधारित है। इसमें उपचार संयंत्र के प्रावधान के साथ 67 लाख रुपये की अनुमानित लागत है। इसकी रूपरेखा भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर भी बनाई गई है।

बयान के मुताबिक, ‘स्कीम के योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन में समुदाय को भी जोड़ा गया था। उन्होंने श्रम के रूप में जलापूर्ति स्कीम में गांव के संस्थानिक घटक के पांच प्रतिशत का योगदान दिया।’ मंत्रालय ने बताया कि जाड़े में शून्य से नीचे के तापमान से लेकर मानसून में लगातार वर्षा के कारण उपचारित जलापूर्ति उपलब्ध कराने का दायित्व आसान नहीं था। बयान में मंत्रालय की ओर से कहा गया, ‘‘निर्माण कार्य सबसे दुष्कर हिस्सा था क्योंकि एक तो कुशल राजगीरों और मजदूरों को ढूंढना बहुत कठिन था और दूसरा अत्यधिक ठंड और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण वे अक्सर काम छोड़ते रहे।’’

जमी हुई बर्फीली सड़क, कोहरे के कारण शून्य दृश्यता और अक्सर होने वाले भूस्खलनों के कारण निर्माण के दौरान सामग्रियों की मालढुलाई और निगरानी भी उतनी ही मुश्किल थी। मंत्रालय ने कहा, ‘इन सभी कठिनाइयों का बहादुरी से सामना करते हुए, निर्धारित स्कीम में परिकल्पित योजना के अनुरूप काम पूरा किया गया। सबसे अधिक प्रसन्न ग्रामीण थे, उनकी प्रसन्नता स्पष्ट रूप से झलक रही थी जब उन्होंने प्रार्थना के समय हाथों में पारंपरिक ‘कड़ा‘ बांधने के साथ अपने घरों में पानी प्राप्त किया।’ ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन अभियान की घोषणा की थी और कहा था कि 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार में नल से जल पहुंचाया जाएगा।