केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अंतर-राज्यीय सीमा मुद्दे पर उत्तर-पूर्वी राज्यों द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आह्वान किया और उन्हें स्थानीय स्तर पर मामले को संभालने के लिए कहा। कई उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच सीमा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अब यह प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है कि वह यथास्थिति बनाए रखे और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की हिंसा से बचे।

सीमा विवाद का समाधान
रिजिजू हाल ही में शपथ ग्रहण करने वाले केंद्रीय मंत्रियों के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित '' जन आशीर्वाद यात्रा' के हिस्से के रूप में अरुणाचल प्रदेश की तीन दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि केंद्र पूर्वोत्तर राज्यों के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करेगा। ''तब तक, प्रत्येक राज्य को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए। ऐसे मुद्दों को स्थानीय स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए ''। 

एक-दूसरे के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार नहीं
उन्होंने सुझाव दिया कि  ''किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए. यथास्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रत्येक राज्य की है। हम दुश्मन नहीं हैं। हम सब देश के नागरिक हैं। सात बहनों (पूर्वोत्तर राज्यों) को एक-दूसरे के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए "। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि "जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में लोगों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं है, तो कोई तनाव नहीं होना चाहिए। पूर्वोत्तर राज्यों को निर्धारित तंत्र के अनुसार सद्भाव में रहना चाहिए।"

सीमा संघर्षों में लगभग 600 लोग मरे
पूर्वोत्तर में अब तक सीमा संघर्षों में लगभग 600 लोगों के मारे जाने की खबर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा से क्षेत्र में मौजूदा शांति भंग होगी। रिजिजू ने असम और मिजोरम के बीच हालिया हिंसा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और कहा कि प्रत्येक राज्य को संतुलित तरीके से काम करना चाहिए और कोई भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए। असम-मिजोरम सीमा पर हाल ही में हुई झड़पों में मारे गए सात लोगों में असम पुलिस के छह जवान शामिल थे और 50 से अधिक घायल हुए थे।