स्नान दान सहित पूर्णिमा तिथि का प्रसिद्ध एवं देव दीपावली का पवित्र पर्व 19 नवम्बर 2021 दिन शुक्रवार को बड़े ही धूम-धाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करना पुण्यफल दायक होता है। इसी दिन खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण भी लगेगा। चन्द्र ग्रहण (chandra grahan) सामान्यतः पूर्णिमा के दिन लगता है ,इस बार भी यह चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन लग रहा है। 

इस चंद्रग्रहण का स्पर्श दिन में 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। मध्य दिन में 2 बजकर 33 बजे होगा तथा मोक्ष दिन में 4 बजकर 17 मिनट पर होगा। यह चन्द्र ग्रहण भारत के सुदूर पूर्वी सीमा अरुणाचल प्रदेश (Arunachal pradesh) से अत्यंत कम समय के लिए ग्रहण का मोक्ष सूक्ष्मता से देखने पर ही दृश्यमान होगा। भारत के अतिरिक्त विश्व के कई राष्ट्रों जैसे रूस, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैण्ड , इंडोनेशिया और चीन के पूर्वोत्तर भागों से दिखाई देगा। भारत में स्पष्ट रूप से दृश्य नहीं होने के कारण धर्मिक दृष्टि से भी महत्वहीन है।

यद्यपि की भारत मे स्पष्ट रूप से दृश्य नहीं होने के कारण धर्मिक दृष्टि से भी महत्वहीन है फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि ग्रहण काल मे ग्रहों की स्थिति के अनुसार मन का कारक ग्रह चद्रमा वृष राशि मे राहु के साथ होंगे तथा केतु के साथ सूर्य रहेंगे अतः चंद्रमा से प्रभावित होने वाले जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।

करें ये काम-

खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण के सूतक काल में दान तथा जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा सरोवरों में स्नान किया जाता है । मंत्रो का जाप किया जाता है तथा इस समय में मंत्र सिद्धि भी की जाती है।

तीर्थ स्नान, हवन तथा ध्यानादि शुभ काम इस समय में किए जाने पर शुभ तथा कल्याणकारी सिद्ध होते हैं। 

धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि अनुसार अथवा किसी योग्य ब्राह्मण के परामर्श से दान की जाने वाली वस्तुओं को इकठ्ठा कर संकल्प के साथ उन वस्तुओं को योग्य व्यक्ति को दे देना चाहिए।

न करें ये काम-

किसी भी ग्रहण के सूतक के समय समय भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना निषिद्ध माना गया है। 

खाना-पीना, सोना, नाखून काटना, भोजन बनाना, तेल लगाना आदि कार्य भी इस समय वर्जित हैं। 

इस समय झूठ बोलना, छल-कपट, बेकार का वार्तालाप और मूत्र विसर्जन से परहेज करना चाहिए। 

सूतक काल में बच्चे, बूढ़े, अस्वस्थ स्त्री आदि को उचित भोजन लेने में कोई परहेज नहीं हैं।

सूतक आरंभ होने से पहले ही अचार, मुरब्बा, दूध, दही अथवा अन्य खाद्य पदार्थों में कुशा तृण डाल देना चाहिए जिससे ये खाद्य पदार्थ ग्रहण से दूषित नहीं होगें। अगर कुशा नहीं है तो तुलसी का पत्ता भी डाल सकते हैं । घर में जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा अथवा तुलसी पत्ता डालना आवश्यक नहीं है।

गर्भवती महिलाएं पेट पर गोबर का लेप कर लें ,चाकू , सुई , इत्यादि से कोई कार्य न करे। सम्भव हो तो टहलें, सोये नही तो उत्तम होगा।

 

खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण भारत मे दृश्य नही होने के कारण धर्मिक दृष्टि से महत्त्व नही है फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अवश्य होता है।