जब से नरेंद्र मोदी (Narendra modi) प्रधानमंत्री बने हैं, वो पूर्वोत्तर के विकास (development of the northeast) पर जोर दे रहे हैं जो काफी समय से लंबित था। उनकी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति ('Act East' policy) फल दे रही है और पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा इसकी काफी प्रशंसा भी की जा रही है। सड़कों, पुलों और हवाई अड्डों ने पूर्वोत्तर के राज्यों को शेष भारत और राजधानी दिल्ली से काफी अच्छी तरह से जोड़ा है। हालांकि, अजीब बात यह है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन परिवर्तनों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, और मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के ईटानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने पूर्वोत्तर में मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई इन विकास परियोजनाओं को छोटा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

दरअसल, देश का पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), चीन (china) के साथ अपनी सबसे लंबी सीमा साझा करता है, उसके बाद म्यांमार (myanmar) और भूटान (Bhutan) का स्थान आता है। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास को मंजूरी दी है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इसमें 598 किलोमीटर लंबी सड़कें और 18 फुट के ट्रैक का निर्माण शामिल है। अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर परियोजनाएं अरुणाचल के उत्तर और पूर्वोत्तर हिस्से में चीन की सीमा से लगे क्षेत्रों में निर्धारित की गई है।

वहीं, अरुणाचल प्रदेश के सांसद और केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Arunachal Pradesh MP and Union Sports Minister Kiren Rijiju) का कहना है कि, “चीन सीमा (china border) पर विकास की गति 2014 के बाद तेज हुई थी। पहले, सरकार एक प्रतिबंधात्मक नीति का पालन करती थी और चीन सीमा के साथ के क्षेत्रों को ज्यादा विकसित नहीं किया गया था। लेकिन अब चीन सीमा पर अब कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और निर्माण तेज गति से हो रहा है। इस परियोजना में मोटर योग्य सड़क, खच्चर ट्रैक और कुलियों के लिए सुविधाएं शामिल हैं।”

गौरतलब है कि दिसंबर 2020, में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में 1162.19 करोड़ की लागत से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के प्रस्ताव को मंजूरी दी, क्योंकि चीन (china) ने भी अरूणाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में नए गांवों की स्थापना और राजमार्गों सहित सड़क नेटवर्क की भूल भुलैया में तेजी से प्रगति की है।