कोरोना वायरस की चपेट में भारत भी है और ऐसे में भारत ने चीन की हेकड़ी निकालने के लिए एक अहम कदम उठा लिया है। दरअसल, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में बने एक पुल को खोल दिया है। ये पुल चीन बॉर्डर के एकदम नजदीक बना हुआ है। इस पुल के खुल जाने से दोनों देशों के बीच संबंध खराब होने की संभावना बढ़ गई है। दरअसल, इस पुल का निर्माण उस इलाके में किया गया है, जिसे चीन अपना बताता है। इस पुल से सैनिकों और भारी हथियार जैसे तोपों की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी।

ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत है कि यह 40 टन तक का भार सहन कर सकता है। ब्रिज अरुणाचल प्रदेश के उस क्षेत्र में तैयार हुआ है, जिसे चीन अपना बताता है। इस क्षेत्र के लिए भारत और चीन के बीच पहले भी विवाद हुआ है। इसके बाद 2019 में बीते वर्षों के मुकाबले 50 प्रतिशत घुसपैठियों का मामला भी बढ़ गया। दिल्ली स्थित रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ नितिन गोखले ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा का यह हिस्सा विवादों का केंद्र रहा है। इसके पहले इस हिस्से में जो पुल था, उसपर विश्वसनीयता की कमी थी। साथ ही मौसम कनेक्टिविटी के हिसाब से भी ब्रिज काफी कमजोर था। अब इस नए पुल के शुरू होने से सैनिकों तक सभी जरूरी चीजें बिना किसी परेशानी के पहुंच सकती हैं। आपको बता दें कि यह ब्रिज डोकलाम पठार के पास स्थित है। यही वो जगह है जहां 2017 में एक महीने तक चीन और भारत के बीच सैन्य गतिरोध चला था।

आपको बता दें कि यह पुल उस वक्त शुरू किया गया है, जब भारत और चीन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। बीजिंग का आरोप है कि भारत दक्षिण पूर्वी एशिया में उसके व्यापार को बाधित कर रहा है। यह आरोप भारत की ओर से फॉरेन इन्वेस्टमेंट को नियंत्रित करने के लिए कानून में लाई गई सख्ती के चलते लगाया गया। भारत ने स्थानीय फर्म्स को बचाने के लिए इस कानून में बदलाव किया था।