चीन और भारत के बीच पूर्वी लद्दाख में मई से शुरू हुआ तनाव अब और भी गंभीर होता जा रहा है। गलवान घाटी की हिंसा के बाद पैंगॉन्ग झील पर भी दोनों सेनाओं की बीच झड़प हुई। वहीं, अब चीन ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने उस पर गोलीबारी की है। इस सबके बीच चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने इस क्षेत्र में भारी सेना और हथियार तैनात करना तेज कर दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से सेना यहां बुलाई जा रही है। 

इस बीच एक खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन की घुसपैठ सिर्फ पूर्वी लद्दाख तक ही सीमित नहीं रही है। उसने 3500 किमी की सीमा पर तीन जगह- उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी अतिक्रमण की कोशिशें कीं। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, अफसरों ने कहा है कि एक मौके पर तो चीनी सेना एलएसी में 40 किमी तक अंदर आ गई थी, जिसे बाद में लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि यह चीन की बड़ी नीति है, जिसके जरिए वह भारतीय सेना को बॉर्डर पर अलग-अलग हिस्सों में व्यस्त रखना चाहता है, ताकि बाद में तनाव के दौरान ही वह अचानक किसी गलत हरकत को अंजाम दे सके। 

हालांकि, अभी भी पूर्वी लद्दाख ही दोनों सेनाओं के बीच टकराव का केंद्र है। बता दें कि भारत और चीन के बीच पिछले चार महीनों से लद्दाख स्थित एलएसी पर तनाव जारी है। हालांकि, गलवान घाटी में हुई दोनों देशों के सैनिकों की मुठभेड़ के बाद से हालात और तनावपूर्ण हुए हैं। बीते दो महीनों में ही चीन ने घुसपैठ की नई कोशिशें की हैं। एक अफसर ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि पीएलए जुलाई में दो बार अरुणाचल प्रदेश की सीमा में घुस गई। एक मौके पर तो चीनी सेना अंजॉ जिले में 26 किलोमीटर अंदर तक घुस आई थी और तीन से चार दिन तक कैंप स्थापित कर के रुकी थी। वहीं दूसरे मौके पर पीएलए अरुणाचल के हदीगरा पास तक 40 किलोमीटर अंदर आ गई थी। हालांकि, बाद में उसे लौटना पड़ा।