अरुणाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये के सड़क घोटाले में कथित रूप से शामिल लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक इंजीनियर ने बुधवार को पश्चिम कामेंग जिले की एक कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस 31 अगस्‍त से ही इस इंजीनियर की तलाश कर रही थी। विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक (SP) हेमंत तिवारी ने बताया कि सेप्पा-चयंगताजो एनईसी सड़क घोटाले में कथित रूप से शामिल पीडब्ल्यूडी के चयंगताजो मंडल के कार्यकारी अभियंता नायकपू यांगफो ने बोमडिला सत्र अदालत के सामने आज आत्मसमर्पण किया।

हेमंत तिवारी ने कहा कि न्यायाधीश ने उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। बता दें कि 2008 में शुरू हुई नॉर्थ ईस्ट काउंसिल (एनईसी) के तहत स्वीकृत 81 किलोमीटर लंबी सड़क का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस साल 5 मार्च को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जांच प्रकोष्ठ में एक मामला दर्ज कराया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि सड़क एक दशक से अधिक समय से निर्माणाधीन है और इसे बनाने में शामिल कंपनियों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सड़क के निर्माण से संबंधित घोटाला में गैमन इंडिया लिमिटेड, गैमन इंजीनियरिंग एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (दोनों मुंबई स्थित फर्म) और हैदराबाद स्थित डीआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच की जा रही है। एसआईसी 172 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच कर रही है। एसपी का कहना है कि इस मामले के मुख्‍य अभियुक्‍त इंजीनियर को पकड़ने के लिए विशेष जांच प्रकोष्ठ (एसआईसी) ने ईटानगर कैपिटल कॉम्प्लेक्स, पूर्वी कामेंग और कुरुंग-कुमे जिलों में कई स्थानों पर छापेमारी की। लेकिन वह सफल नहीं हुए। एसआईसी ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया था।

वहीं पीडब्ल्यूडी के चयंगताजो मंडल के कार्यकारी अभियंता नायकपू यांगफो ने अंतरिम राहत के लिए आज गुवाहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर पीठ का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उन्‍हें जमानत देने से इनकार कर दिया। यांगफो, 2009 से 2011 तक च्यांगताजो पीडब्ल्यूडी डिवीजन में सहायक अभियंता के रूप में तैनात थे और बाद में प्रमोट होकर डिवीजन में कार्यकारी अभियंता बन गए। डीआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक के साथ पीडब्ल्यूडी के दो वरिष्ठ इंजीनियरों को इस महीने की शुरुआत में घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया था।