अरुणाचल प्रदेश के बोरदुमसा में बिजॉयपुर गांव के निवासी शिहा मोग को ग्रामीण बेरोजगारी के कारण गांव और पैतृक घर छोड़ना पड़ा था। हालांकि अब केंद्र सरकार के एनईआरसीआरएमएस की सहायता से वह अपने गांव लौट आए हैं और यही एक सुरक्षित और रोजगार भी हासिल कर रहे हैं।

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शिहा मोग ने बताया कि विवाह के बाद उन्हें उनके परिवार से अलग होना पड़ा था और उनके पास आय का कोई साधन नहीं था। वह रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य में चले गए, लेकिन उन्हें ऐसा काम नहीं मिला जिससे उनके परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके। बाद में वह घर लौट आये और अपने पिता की साझा भूमि पर उगाई जाने वाली फसलों की खेती फिर से शुरू कर दी। उनके परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति केवल खेती से नहीं हो सकती थी।

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शिहा मोग ने बताया कि वर्ष 2019 में जब एनईआरसीआरएमएस ने गांव में अपनी भूमिका निभानी शुरू की तो उन्होंने एनएआरएमजी की बैठक में अपने पसंद के कार्य का प्रस्ताव रखा। इसे बाद में एडब्ल्यूपीबी- 2019-2020 के माध्यम से रखा गया। 2019 में वह विद्युत गतिविधि के साथ एनईआरसीआरएमएस के अंतर्गत परियोजना के लाभार्थी बने। उन्हें परियोजना से 25000- रुपये प्राप्त हुए और उन्होंने अपनी 5000 रुपये की बचत से गांव में बिजली की दुकान खोली। शुरूआत में उन्होंने अपने परिवार के जीविकोपार्जन के लिए हाउस वायरिंग का काम किया। बाद में, उन्होंने एक अन्य व्यवसाय का भी शुभारंभ किया। इस परियोजना ने उनके जीवन को बदल दिया। उन्हें कृषि पर निर्भर व्यक्ति से तकनीकी रूप से स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में पहचान दी। 12000- प्रति माह की राशि अर्जित करके, वह आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बन गये और उन्होंने अपने तकनीकी व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित किया। इस पहल के परिणामस्वरूप, परियोजना ने उन्हें अपने परिवार के लिए अपनी वार्षिक आय बढ़ाने का अवसर दिया।