अरुणाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव दानी सालू (Dani Salu) ने कहा कि सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर शोधकर्ता चिंतन शेठ के अनुसार, "मलबे का प्रवाह वारियांग बुंग नदी के किनारे, मरजंगला, खेनेवा सर्कल क्षेत्र और बाढ़ कटाव घाटी में दिखाई दे रहा है।"
सालू ने यह भी कहा कि "वरिआंग बुंग नदी के ऊपर की ओर, कई हिमनद हैं, और यह देखा गया है कि हिमनद चले गए हैं। हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि ग्लेशियर (glacier) की ये गतिविधियां असामान्य है।”
दानी सालू (Dani Salu) ने कहा कि "हालांकि कामेंग नदी में गड़बड़ी की सही उत्पत्ति और कारण का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है, लेकिन क्षेत्र में भारी बादल छाए रहने के कारण उपग्रहों द्वारा कोई निश्चित चित्र और जानकारी एकत्र नहीं की जा सकी है।"
यह सूचित करते हुए कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस मामले को शिलांग स्थित उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) और केंद्रीय जल आयोग के साथ उठाया है ताकि मैलापन के कारण और स्रोत की पहचान करने में मदद मिल सके। पूर्वी कामेंग जिला प्रशासन ने सेप्पा-चायांग ताजो रोड के साथ विभिन्न बिंदुओं पर नदी का भौतिक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पारा, पक्के, पचुक, पाची और पाचा जैसी सभी सहायक नदियों का पानी साफ था। मरजंगला में कामेंग नदी के तट पर मिट्टी और पेड़ के मलबे के मोटे निक्षेप पाए गए। सालू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सरकार ने NDRF और SDRF टीमों को सतर्क कर दिया है और राज्य सरकार ARSAC, ईटानगर के साथ लगातार संपर्क में रहते हुए कामेंग नदी की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है; NESAC, शिलांग, इसरो और केंद्रीय जल आयोग।