कोरोना के खिलाफ इंडियन आर्मी लगातार ऑप्रेशन नमस्ते चला रही है। क्वारंटाइन और आइसोलेशन सेंटर से शुरु हुआ ऑपरेशन नमस्ते अब काफी आगे बढ़ चुका है। किसी भी हालात से निपटने के लिए सेना ने अब अस्पताल तैयार कर लिए हैं। सैकड़ों की संख्या में नर्सिंग असिस्टेंट्स को ट्रेनिग देकर उन्हें तैयार किया गया है। कोविड रेस्पांस टीम बनाई गई हैं। कोरोना पॉजिटिव या सस्पेक्ट का इलाज करने के साथ ही सेना अब इलाकों को सैनिटाइज़ भी करेगी। इसके लिए अलग से कोविड रेस्पांस टीम बनाई गई हैं। कश्मीर में स्थानीय डॉक्टरों की मदद करने के साथ ही अरुणाचल प्रदेश के तवांग शहर को भी सेना ने संभाला हुआ है।


वैसे तो नॉर्थ ईस्ट में कोरोना के केस की संख्या कम है। बावजूद इसके कोरोना से लड़ने के लिए सेना की तैयार पूरी है। इसके लिए सेना द्वारा कोलकाता के पास बैरकपुर, शिलांग और लीकाबाली में तीन अस्पताल तैयार किए जा रहे हैं। जिसमे कुल 490 कोरोना पीड़ितों का इलाज किया जा सकेगा। आपात स्थिति में इन अस्पतालों में बैड की संख्या को ढ़ाकर 590 तक किया जा सकेगा। खास बात यह है कि यह तीनों पूरी तरह से कोविड अस्पताल हैं। यह आम नागरिकों के लिए बनाए गए हैं। यह अस्पताल 20 अप्रैल तक तैयार हो जाएंगे।


कोविड अस्पताल या किसी भी क्वारंटाइन और आइसोलेशन सेंटर में नर्सिंग असिस्टेंट्स की कमी न हो इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। किसी भी कमी को पूरा करने के लिए 1200 बैटलफील्ड नर्सिंग असिस्टेंट्स को स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। चार क्विक रिएक्शन मेडिकल टीमें भी तैयार की गई हैं। जरूरत पड़ने पर यह टीम देश के किसी भी हिस्से में भेजी जा सकेंगी।


सेना ने कोर ऑफ इंजीनियर्स और आर्मी मेडिकल कोर के सैनिकों को मिलाकर पूरे देश में 7 कोविड रेस्पांस टीम भी बनाई हैं। ये टीमें किसी भी जगह पर कोरोना के मामले के बढ़ने या प्रकोप होने पर तुरंत मरीज़ों को सिर्फ राहत ही नहीं देंगी बल्कि पूरे इलाक़े से संक्रमण हटाने और सफाई जैसे काम में तैनात की जाएंगी। अरुणाचल प्रदेश के तवांग शहर में सेना इसी तरह का काम कर रही है। संक्रमण की संभावना पर लोगों की देखभाल तो कर ही रही है, साथ में पूरे शहर को संक्रमण मुक्त कराने का और साफ-सफाई का अभियान चलाए हुए हैं।


कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा, श्रीनगर और अखनूर में डॉक्टरों की पर्सनल प्रोटेक्शन के लिए सेना किट के अलावा मास्क और सेनेटाइज़र भी मुहैया करा रही है। ऐसे इलाक़ों में ज़रूरी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण सेना की ये मदद बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। दिल्ली के नरेला में बने आइसोलेशन सेंटर में सेना 7 अप्रैल से स्क्रीनिंग का काम संभाले हुए हैं।