अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक निंगोंग एरिंग ने पैंगोंग झील क्षेत्र में विस्थापन के लिए चीन के साथ भारत के समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) 1959 से अभी तक तवांग से लेकर अंजाव क्षेत्र पर कब्जा किए हुए है और यहां लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य कर रही है।

कांग्रेस विधायक ने बताया कि 1959 में जब दलाई लामा तवांग आए, तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश किया और भारत में गहरी घुसपैठ की। हालांकि, अमानवीय परिस्थितियों के कारण उन्हें वापस जाना पड़ा था लेकिन, चीन अभी भी उस स्थान पर काबिज है, जिसे भारत ने उनसे वापस ले लिया था। उन्होंने तवांग से लेकर अंजाव तक झोपड़ियां बनाई हुई हैं।

चीनी नीति लोगों को तवांग से अंजाव तक उन झोपड़ियों में रहने के लिए दबाव डालना है। वे रोडवेज और रेलवे जैसी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करके भारत के साथ सीमा क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये घर चीन के सामरिक कदम हैं, क्योंकि अगर ये घर इस क्षेत्र में रहते हैं, तो उनका क्षेत्र पर अधिक दावा है।

अगर चीन को अंतर्राष्ट्रीय दबाव न्यायिक रूप में आता है, तो उन्हें मैकमोहन रेखा का पालन करना होगा, जिसे उन्होंने 1914 में स्वीकार कर लिया है। फिर वे सभी झोपड़ियां मैकमोहन रेखा के अंदर आएंगी। चीन ने पहले ही नॉर्थ-ईस्टर्नियर एजेंसी (NEFA) में मकान बना लिए थे।