भारत के साथ चीन कूटनीतिक माइंड गेम खेलना जारी रखे हुए है। एक तरफ तो वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के खात्मे के लिए लगातार वार्ता कर रहा है और इस मामले को बातचीत से तनाव को दूर करने की बात कर रहा है। दूसरी तरफ चीन का विदेश मंत्रालय रह रह कर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की वैधता को लेकर सवाल उठा रहा है। 

मंगलवार को चीन ने कहा है कि ये दोनो इलाके भारत के अवैध कब्जे में है और वह उन्हें मान्यता नहीं देता है। भारत जिस तरह से इन दोनों  इलाकों में सड़क, पुलों आदि का निर्माण कर रहा है उससे चीन की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि चीनी विदेश मंत्रालय यह सुझाव भी दे रहा है कि भारत इन इलाकों में ढांचागत विकास नहीं करे। चीन के विदेश मंत्रालय के परंपरागत प्रेस कांफ्रेंस में लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश व अन्य सीमावर्ती इलाकों में 44 पुलों के निर्माण को लेकर सवाल पूछा गया था। 

जवाब में वहां के प्रवक्ता ने कहा कि चीन भारत की तरफ से गैर कानूनी तौर पर स्थापित केंद्र शासित लद्दाख और अरूणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है। हम विवादग्रस्त इलाके में सैन्य उद्देश्य से किये जाने वाले किसी भी ढांचागत विकास का विरोध करते हैं। दोनो पक्षों को कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे कि मौजूदा कोशिशों को धक्का लगे।

हाल के दिनों में भारत की तरफ से सीमावर्ती इलाकों में ढांचागत विकास भी तेज किया गया है और सैनिकों की तैनाती भी की जा रही है। यह तनाव की मूल वजह है। हम भारतीय पक्ष से यह आग्रह करते हैं कि दोनो पक्षों के बीच तनाव घटाने को लेकर जो सहमति बनी है उसका पूरी तरह से पालन किया जाए। दोनो पक्षों को मामले को उलझाने की कोई कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह पिछले एक पखवाड़े में दूसरा मौका है जब चीन ने लद्दाख के साथ ही अरूणाचल प्रदेश की स्थिति को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की है। 

पूर्व में जब चीन की तरफ से इस तरह की कोशिश हुई थी तो भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इसे एक सिरे खारिज कर दिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि भारत जो भी ढांचागत विकास कर रहा है वह अपने इलाके में कर रहा है और किसी भी तरह से दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन नहीं करता है। पिछले दिनों में ताइवान में जिस तरह माहौल तेज हुआ है उसे लेकर भी चीन दबाव में है।