चीन की सेना लद्दाख से अरुणाचल तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ कई संवेदनशील स्थानों पर नए सिरे से घुसपैठ की कोशिश कर रही है। चीन के सैनिक इन्हीं स्थानों पर अतीत में भी घुसपैठ की कोशिश कर चुके हैं। ताजा खुफिया सूचना के अनुसार भारतीय सेना और ITBP को अलर्ट कर दिया गया है। इसी तरह चीन ने विवादित क्षेत्र हॉट स्प्रिंग्स में चार नए मोबाइल टॉवर लगाए हैं और एलएसी के करीब उपग्रह संचार प्रणाली का परीक्षण कर रहा है।

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हाल ही में खुफिया इनपुट से पता चला है कि चीन की सेना लद्दाख से अरुणाचल तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ कई 'संवेदनशील' स्थानों पर नए सिरे से घुसपैठ की योजना बना रही है। सेना को अपनी परिचालन और बुनियादी ढांचा क्षमताओं को बढ़ाने के साथ ही इन संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कहा गया है। अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों को एलएसी पर चीनी सेना की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। मौजूदा समय में एलएसी के साथ दोनों सेनाओं के 14 हजार फीट और उससे अधिक ऊंचाई पर लगभग 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं।

अभी तक भारत और चीन के बीच 15 दौर की सैन्य वार्ता हो चुकी हैं लेकिन पीएलए हॉट स्प्रिंग्स और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देप्सांग मैदान से पीछे हटने को तैयार नहीं है। हालांकि, चीन आंशिक रूप से गलवान घाटी, गोगरा और पैन्गोंग झील के दोनों किनारों से पीछे हट गया है। अचिह्नित एलएसी को लेकर भारत और चीन की धारणाएं भिन्न हैं, इसीलिए दोनों सेनाएं अक्सर एक दूसरे पर घुसपैठ का आरोप लगाती हैं। दोनों देश मई, 2020 से लद्दाख में कई बिंदुओं पर सीमा गतिरोध में बंद हैं। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारत के दावे वाले क्षेत्र के करीब 1,000 वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर लिया है।

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खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब के क्षेत्रों में अपने मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। चीनी पीएलए उत्तरी सीमाओं, एलएसी और अब अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों में कई स्थानों पर तियानटोंग उपग्रह संचार प्रणाली का परीक्षण कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने खुफिया जानकारी के हवाले से कहा कि मई, 2020 में पूर्वी लद्दाख में गतिरोध शुरू होने के बाद से तिब्बत में और एलएसी के साथ पीएलए ने यूएवी की तैनाती बढ़ाई है। चीन के एक एकीकृत कमांड सेंटर से यूएवी उड़ानों को संचालित करके व्यापक निगरानी की जाती है। चीन तिब्बत में एलएसी के करीब अपने उन्नत यूएवी को तेजी से तैनात कर रहा है।