चीन ने बुम ला पास से करीब पांच किलोमीटर दूर कम से कम तीन गावों का निर्माण किया है, जो कि पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में भारत, चीन और भूटान के बीच त्रिकोणीय जंक्शन के करीब स्थित है। इस क्षेत्र में भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद है और यह नया निर्माण अरुणाचल प्रदेश की सीमा के साथ चीन के अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

चीन की गतिविधियों पर नजर रखने वाले ब्रह्म चेलानी का कहना है कि चीन अपने क्षेत्रीय दावों को मजूबत करने और सीमा पर घुसपैठ को बढ़ाने के लिए भारत की सीमा के पास कम्युनिस्ट पार्टी के हैन चाइनीज और तिब्बती सदस्यों को बसा रहा है।

जैसे चीन दक्षिण चीन सागर में मछुआएं का इस्तेमाल करता है। चीन भारतीय गश्त वाले हिमालयी क्षेत्रों में घुसपैठ करने के लिए नागरिक संसाधनों- चरवाहों और ग्रेजर (घास खाने वाले जानवरों) का उपयोग करता है।

इस रिपोर्ट में पेश की गई नई सैटेलाइट इमेज ऐसे समय सामने आई है जब एक हफ्ते पहले भूटानी क्षेत्र में चीनी गांवों को बसाने की तस्वीरें सामने आई थीं। यह डोकलाम की उस साइट से करीब सात किलोमीट दूर है, जहां वर्ष 2017 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी थी।

इस रिपोर्ट में दिखाए गए गांव चीनी क्षेत्र में स्थित हैं और इनका निर्माण ऐसे समय में किया जा रहा है जब पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की फोजें आमने-सामने हैं। 1962 के युद्ध के बाद दोनों देश तनाव के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। भारत और चीन ने सीमा पर भारी तैनाती कर रखी है। आठ दौर की सैन्य वार्ता होने के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।

इस रिपोर्ट में दिखाई गई तस्वीरें प्लैनेट लैब्स से हासिल की गई हैं। 17 फरवरी, 2020 तक इस क्षेत्र में सिर्फ एक गांव दिख रहा है। इसमें 20 से ज्यादा संरचनाएं (घर) नजर आ रही हैं, इन्हें आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्र में बनाए जाने वाले लकड़ी के घर माना जा रहा है, जिसे लाल रंग की छत के जरिये आसानी से पहचाना जा सकता है। दूसरी तस्वीर, 28 नवंबर की है, जिसमें कम से कम 50 स्ट्रेक्चर के साथ तीन अतिरिक्त एन्क्लेव नजर आ रहे हैं। हर एन्क्लेव दूसरे अन्य एन्क्‍लेव से एक किलोमीटर अंदर है।