केंद्र सरकार की सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने पूर्वोत्तर राज्यों में परिवहन चुनौतियों को दूर करने के लिए कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में रोपवे (Ropeway)बनाने का निर्णय लिया है। जिससे मजबूत बुनियादी ढांचा और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी विकसित किया जा सके।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को कहा, 'पहाड़ी क्षेत्रों में एक कुशल परिवहन नेटवर्क विकसित करना एक बड़ी चुनौती है। इन क्षेत्रों में रेल और हवाई परिवहन नेटवर्क सीमित हैं, जबकि सड़क नेटवर्क के विकास में तकनीकी चुनौतियां हैं। इस पृष्ठभूमि में, रोपवे एक सुविधाजनक और सुरक्षित वैकल्पिक परिवहन साधन के रूप में उभरा सकता है।'

बता दें कि हाल ही में साल 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम 'पर्वतमाला' को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के माध्यम से विकसित किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा था कि यह मॉडल कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों का पसंदीदा पारिस्थितिक रूप से स्थायी विकल्प होगा। यह कनेक्टिविटी में सुधार करेगा और पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में भीड़ कम होगी।

गौर हो कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा की कि साल 2022-23 में 60 किमी की लंबाई के लिए 8 रोपवे परियोजनाओं के लिए ठेके दिए जाएंगे। यह योजना वर्तमान में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, जम्मू और कश्मीर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे क्षेत्रों में शुरू की जा रही है।

बता दें कि रोपवे के विकास के लिए हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर की सरकारों से भी प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।