अब भारत के सामरिकता को देखकर चीन कांपने वाला है। क्योंकि सीमा सड़क संगठन पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ विशेष रूप से सामरिक महत्व के सीमांत क्षेत्रों में ढांचागत परियोजनाओं के एक विशाल नेटवर्क का निर्माण कर रहा है।

BRO सुचारू रूप से आगे की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी प्रदान करने पर काम कर रहा है। इस संगठन का यह काम स्थानीय आबादी की कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ाने वाला है। इसी कड़ी में हाल ही में, बीआरओ के महानिदेशक (डीजी) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने कार्य प्रगति का जायजा लेने के लिए अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया है।

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महानिदेशक यह दौरा महत्वपूर्ण था खासकर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के हिस्से के रूप में पर्यटकों के लिए चीनी सीमा के पास बस्तियों को खोलने के केंद्र के फैसले के परिप्रेक्ष्य में काफी महत्व का है। नाहरलगुन में मुख्यालय के साथ 2008 में स्थापित बीआरओ के प्रोजेक्ट अरुणांक ने भारत-चीन सीमा से सटे क्षेत्रों, कठिन ऊपरी सुबनसिरी और कुरुंग कुमे जिलों के साथ बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डीजी ने कुरुंग कुमे जिले के हुरी सेक्टर में एलएसी के साथ राज्य के अग्रिम सीमा क्षेत्रों में निरंतर सड़क, पुल और फुट ट्रैक विकास की जांच भी की। उन्होंने पगडंडियों का निरीक्षण करने के बाद परियोजना अरुणांक की सराहना की क्योंकि वे भारी वाहनों के साथ सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही की सुविधा के लिए मोटर योग्य थे। उन्होंने नौ लोगों को उनके उत्कृष्ट प्रयासों की स्वीकृति में मौके पर ही डीजीबीआर प्रशंसा पत्र प्रदान किए।

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इसी के साथ ही उन्होंने बीआरओ और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के अधिकारियों के साथ बातचीत की और राज्य के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा को नई दिल्ली जाने से पहले चल रही रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।