अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में आए हिमस्खलन (Avalanche In Arunachal Pradesh) में लापता होने वाले सेना के सात जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। बता दें कि ये जवान रविवार को कामेंग क्षेत्र में ऊंचाई वाले इलाकों में गश्त कर रहे थे। इस दौरान आए हिमस्खलन में सात जवान फंस गए। 

तेजपुर स्थित रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) लेफ्टिनेंट कर्नल हर्षवर्धन पांडे (Lt Col Harshvardhan Pandey) ने कहा, अभी तक सात जवानों की कोई खबर नहीं है। हालांकि गहन खोज और बचाव अभियान जारी है। पीआरओ ने कहा कि लापता जवानों का पता लगाने के लिए खोज और बचाव अभियान जारी है और बचाव अभियान में सहायता के लिए विशेष टीमों को भेजा गया। लेफ्टिनेंट कर्नल पांडे ने बताया कि इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से भारी बर्फबारी (Snowfall in Arunachal) होने पर मौसम बेहद खराब हो गया है। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली बर्फबारी के बाद जब गर्मी में बर्फ पिघलती है तो चट्टानों और मिट्टी को मुलायम बना देती है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ढलानों पर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होने की वजह से चट्टानें और मिट्टी नीचे खिसकने लगती हैं। यही हिमभूस्खलन (avalanche) का कारण बनतीं हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कुल जमीन में से 12 फीसदी जमीन ऐसी है जो भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील है। भूस्खलन (landslide) के लिहाज से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलावा देश के पश्चिमी घाट में नीलगिरि की पहाडय़िां, कोंकण क्षेत्र में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और गोवा, आंध्र प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र, पूर्वी हिमालय क्षेत्रों में दार्जिलिंग, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के कई इलाके भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं।