अरुणाचल प्रदेश के तिरप में ऐसी घटना सामने आई है जिसको लेकर हर कोई हैरान है। यहां फिशिंग ट्रिप से घर लौट रहे 2 युवकों पर 12 पैरा (स्पेशल फोर्स) यूनिट ने गलती से फायरिंग कर दी। पैरा यूनिट आतंकियों के इंतजार में घात लगाए हुई थी लेकिन अनजाने में स्थानीय युवकों पर गोली चल गई।

सेना ने तुरंत दोनों घायल युवकों नोक्फया वांगदान (24) और रामवांग वांग्सू (26) को डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में एयरलिफ्ट किया। तिरप डीसी तारो मिजे ने बताया, 'सेना ने दोनों के परिवार से संपर्क कर माफी मांगी और मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाने के लिए प्रत्येक के परिजनों को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी।'

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इस घटना में एक युवक के पैर पर और दूसरे के सिर पर गोली लगी है। डीसी के मुताबिक दोनों घायल युवक और उनके दो दोस्त फिशिंग ट्रिप से लौट रहे थे और फौजी टाइप ड्रेस पहने हुए थे। इसके चलते उन्हें पहचानने में गलती हुई। उन्होंने कहा, 'जब लड़के चिल्लाने लगे कि वे नागरिक हैं आतंकी नहीं, तब कमांडो ने तत्काल फायरिंग रोक दी।'

हालांकि, इसके बाद भीड़ ने गोलीबारी करने वाली विशेष बल इकाई को घेर लिया था। इसके बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने वीडियो जारी स्वीकार किया उनसे पहचान करने में गलती हो गई और माफी मांगी। इसके बाद जाकर ही ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। सेना के एक सूत्र ने कहा, 'सशस्त्र उग्रवादियों की आवाजाही संबंधी विश्वसनीय सूचना थी, जिसके चलते विशेष बलों ने कार्रवाई की।'

एएमसीएच के अधीक्षक डॉ प्रशंता दिहिंग्या ने कहा कि घायलों में से एक के हाथ में जबकि दूसरे के पैर में गोली लगी। उन्होंने कहा कि दोनों घायल खतरे से बाहर हैं। घायलों को अस्पताल ले जाने के दौरान साथ रहे एक ग्रामीण ने बताया, 'वे दोनों अनाथ हैं। अब एक का हाथ जबकि दूसरे का पैर जख्मी है। सरकार को दोनों के लिए कुछ करना होगा।'

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इस बीच, तिराप जिले के बीजेपी अध्यक्ष कामरांग तेसिया ने कहा कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय सुरक्षा बलों के ऐसे कृत्यों के कारण उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।

आपको बता दें कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AAFSA) को पूर्वोत्तर के चार राज्यों- असम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के केवल 31 जिलों में पूरी तरह और 12 जिलों में आंशिक रूप से प्रभावी है। अरुणाचल प्रदेश के तिरप में अगले 6 महीने के लिए आफस्पा को बढ़ाया गया है।

आफस्पा सुरक्षा बलों को अभियान चलाने और बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करता है और अगर सुरक्षा बलों की गोली से किसी की मौत हो जाए तो भी यह कानून उन्हें गिरफ्तारी और अभियोजन से संरक्षण प्रदान करता है।