अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले के घने जंगलों से पुलिस ने 11 दिन के लगातार तलाशी अभियान के बाद असम के अपहृत मजदूर हिरेन कोंच और बिहार के रामाशीष महतो को बरामद किया। दोनों मजदूरों का 31 जनवरी को कथित तौर पर एनएससीएन (के-वाईए) से संबंधित भूमिगत उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था।

अगवा किए गए तीन मजदूरों में से एक बनफुआ वांगपन पहले ही 1 फरवरी को लौट आया था। पुलिस को पहले संदेह था कि अपहरण का कारण फिरौती हो सकता है। पुलिस ने बताया कि दोनों को नागालैंड से सटे पोंगचौ सर्कल से रात करीब 11 बजे बरामद किया गया। इसके बाद तलाशी अभियान में पुलिस ने हिरेन कोंच और रामाशीष महतो को बचा लिया है। लांगडिंग एसपी विक्रम हरिमोहन मीणा ने दोनों को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया है। बता दें कि जिले के पुमाओ अंचल के लोंगखाव व पुमाओ गांव के बीच स्थित सडक़ निर्माण में लगे मजदूरों के शिविर  में 31 जनवरी की रात करीब साढ़े नौ बजे पांच से छह संदिग्ध कैडरों का दल आया और तीनों का अपहरण कर लिया। उन्हें नागालैंड ले जाया गया। 

इस बीच असम पुलिस ने ऊपरी असम के डिब्रगूढ़ जिले के टिंगखोंग के निवासी हिरेन कोंच को वापस लाने के लिए अरुणाचल के साथ संपर्क किया है। जबकि पुलिस सूत्रों ने कहा कि महतो भी जल्द ही घर लौट जाएगा। डिब्रूगढ़ के एसपी श्वेतांक मिश्रा ने कहा कोंच के परिवार को उनके ठीक होने की सूचना दे दी गई है। टिंगखोंग विधायक और असम के मंत्री बिमल बोरा ने पूरी प्रक्रिया पर संतोष जताया है। इससे पहले बोरा ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को घटना के बारे में विस्तार से बताया और अपहृत मजदूर का पता लगाने में कोई कसर नहीं छोडऩे के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। बोरा ने कहा, मेरी जानकारी के अनुसार, उसे (कोंच) अरुणाचल-म्यांमार सीमा के पास एक स्थान से बरामद किया गया था। असम से मजदूर निर्माण कार्यों के लिए अरुणाचल प्रदेश जाते हैं क्योंकि पड़ोसी राज्य में मजदूरों की हमेशा मांग रहती है।