अरूणाचल प्रदेश के IRBn SI Shibu George murder case में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन तीनों की पहचान सद्दाम हुसैन (24), रमजान आलम (24) और मोहम्मद आशिक हुसैन (22) के रूप में हुई है। पकड़े गए ये सभी तीनों मुस्लिम आरोपी बिहार के रहने वाले थे। इन सभी ने मिलकर 31 मार्च को एसआरपीएल कॉलोनी में अपने आधिकारिक क्वार्टर में आईआरबीएन एसआई शिबू जॉर्ज की हत्या की थी।

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पुलिस के मुताबिक, तीनों रात करीब नौ बजे जॉर्ज के घर पहुंचे और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने कहा कि घटना रात 10:30 से 11:30 बजे के बीच हुई, पुलिस ने कहा कि, अपराध करने के बाद, वे स्कूटर पर पहले नाहरलगुन और बाद में असम के लखीमपुर भाग गए। जोलांग और ईटानगर में पंजाबी ढाबे के पास टायर की दुकान चलाने वाले सद्दाम हुसैन की पहचान अपराध के पीछे के मास्टरमाइंड के रूप में की गई है।

आईसीआर के एसपी जिमी चिराम ने गुरुवार को यहां पुलिस मुख्यालय में मीडियाकर्मियों को बताया, "जॉर्ज ने पहले सद्दाम को उसके व्यवसाय में मदद की थी, और सद्दाम को जॉर्ज को लगभग 2 लाख रुपये चुकाने पड़े थे।" चिराम ने बताया कि एक फोरेंसिक टीम का गठन किया गया था और, “विस्तृत जांच के माध्यम से, पुलिस ने सद्दाम हुसैन को मुख्य संदिग्ध के रूप में पहचाना।

चिराम ने कहा “तीन से चार घंटे की तलाशी के बाद, सद्दाम को 1 अप्रैल को लखीमपुर जिले से गिरफ्तार किया गया था। निगरानी दल ने सूचित किया कि दो आरोपी बिहार भाग गए थे।” चिराम ने बताया कि पुलिस की एक टीम एसआईटी टीम के साथ मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां दोनों के उतरने की उम्मीद थी, लेकिन दोनों आरोपी अलग स्टेशन पर उतर गए थे।

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एसपी ने बताया, लखीमपुर से दो आरोपी, आशिक और रमज़ान, बिहार के लिए रवाना हो गए, जबकि मुख्य आरोपी, सद्दाम हुसैन, लखीमपुर में वापस रह गया क्योंकि वह अपने परिवार को साथ ले जाने की योजना बना रहा था। “पुलिस की मौजूदगी को भांपते हुए, दोनों पश्चिम बंगाल भाग गए। बाद में, पश्चिम बंगाल पुलिस की मदद से, आखिरकार 6 अप्रैल को नैहाटी पुलिस स्टेशन से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया । फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस रिमांड में हैं।

चिराम ने कहा, "टायर की दुकानों में इस्तेमाल होने वाले चाकू से अपराध को अंजाम देने के लिए व्यापक तैयारी की गई थी।" चिंपू पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 302/201 के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीएसपी कामदम सिकॉम, एल/इंस्पेक्टर मेला मिबांग, इंस्पेक्टर ताखे तासो, एसआई एसएस झा, एके झा और केंटर ताचा, और एसआईटी के इंस्पेक्टर पाडी न्याकांग और टेची विजय की एक संयुक्त टीम द्वारा जांच की गई।