स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के लिए, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शिक्षक दिवस पर ईटानगर के बैंक्वेट हॉल में स्थानीय बोलियों की आठ पाठ्यपुस्तकों का शुभारंभ किया। पुस्तकों का विमोचन करते हुए, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, “भाषा को बचाना हमारी संस्कृति और जड़ों को संरक्षित करना है। हमारी जड़ को भुलाया नहीं जाना चाहिए और हमारी विशिष्ट पहचान को जीवित रखा जाना चाहिए।"

बता दें इस किताब में आठ बोलियों की पाठ्यपुस्तकों में न्याशी, वांचो, गालो, टैगिन, कमान, तारां, इडु और तांगसा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारी अधिकांश युवा पीढ़ी घर पर भी अपनी मातृभाषा नहीं बोलती है। स्थानीय बोली की पाठ्यपुस्तक होने से न केवल इन बच्चों को अपनी बोली सीखने में मदद मिलेगी बल्कि इसे संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। अगर हम इसे संरक्षित नहीं करेंगे तो कौन करेगा?” ।


इन्हें अगले शैक्षणिक वर्ष से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तकों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इन आठ जनजातियों के समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ) को पाठ्यपुस्तकें तैयार करने और राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को कार्यों के समन्वय के लिए बधाई दी है और राज्य में अन्य सभी जनजातियों को अपनी बोलियों के साथ योगदान करने के लिए आमंत्रित किया है।


50 वर्षों में लगभग 250 भाषाएं विलुप्त


तांगसा स्क्रिप्ट डेवलपमेंट कमेटी के उपाध्यक्ष, कामजाई ताइस्म ने कहा कि “देश में 600 से अधिक भाषाएँ अस्तित्वहीन होने के कगार पर हैं। पिछले 50 वर्षों में लगभग 250 भाषाएं विलुप्त हो गई हैं। हमारी स्थानीय बोलियों की पाठ्यपुस्तकों का विमोचन हमें आशा और जश्न मनाने का एक कारण देता है,"। चांगलांग जिले के एक तांगसा लिपि प्रमोटर वांग्लुंग मोसांग ने कहा, "स्थानीय बोलियों को सीखना हमारे भूले हुए लोकगीतों और समृद्ध आदिवासी गीतों और रीति-रिवाजों को पुनर्जीवित करेगा।"