अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ बी डी मिश्रा और मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को 'करगिल विजय दिवस' पर 1999 के करगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात सैन्यकर्मियों से डिजिटल माध्यम से बात की। मुख्यमंत्री ने तवांग जिले के चुजे सेना प्रतिष्ठान में एक कार्यक्रम में करगिल युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी।

खांडू ने कहा, ‘आज समूचा देश करगिल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इस धरती के सच्चे सपूत के रूप में उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा। भारतीय सेना में सभी रैंकों के लिए ये बहादुर सैनिक प्रेरणा बने रहेंगे।’ अरुणाचल के सबसे कठिन और प्रतिकूल इलाकों में से एक में सेवा करने के लिए सेना को धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल के लोग सीमाओं की रक्षा में अपनी भूमिका को बहुत महत्व देते हैं।

अरुणाचल प्रदेश में सेना और आम नागरिकों के बीच के सौहार्दपूर्ण संबंध को ‘‘अतुलनीय’’ बताते हुए खांडू ने कहा कि स्थानीय आबादी और रक्षा कर्मी दोनों जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद और सहयोग करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी मदद और सहायता की आवश्यकता होगी अरुणाचल प्रदेश हमेशा सेना के साथ रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे महान राष्ट्र की क्षेत्रीय पवित्रता को भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।’’

इससे पहले दिन में खांडू ने करगिल युद्ध के शहीदों की याद में बने तवांग युद्ध स्मारक में पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यहां राजभवन में भी करगिल विजय दिवस का आयोजन हुआ। इस दौरान उपमुख्यमंत्री चौना मीन भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ बी डी मिश्रा ने उन चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जिनका सैनिकों ने युद्ध में सामना किया था और सशस्त्र बलों के 527 शहीद नायकों की वीरता और सर्वोच्च बलिदान को याद किया, जिनकी बहादुरी और वीरता के परिणामस्वरूप करगिल की ऊंचाइयों पर पाकिस्तानी सैनिकों को हराया गया था। उपमुख्यमंत्री मीन ने कहा कि करगिल युद्ध की जीत कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।