सेना प्रमुख प्रमुख एमएम नरवणे (Army Chief Chief MM Naravane) ने गलवान मामले में चीन को कड़ा संदेश दिया है। नरवणे ने कहा है कि संघर्ष अंतिम उपाय है और अगर प्रयास किया तो हम विजयी होकर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) से बातचीत में पिछले जनवरी से उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में सकारात्मक फल मिला है। हां लेकिन, आपसी मनमुटाव के बाद भी आंशिक खतरा कम नहीं हुआ है। हमारी ओर से बल की तैनाती एलएसी (LAC) पर की गई है। साथ ही वहां आवश्यक सुरक्षा इंतजाम भी किए जा रहे हैं। एलएसी पर बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, पुलों आदि का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न इलाकों में आतंकवादियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस मामले पर भारत जीरो टॉलरेंस में यकीन करता है। नरवने ने कहा कि लद्दाख में कई जगहों पर चीन के साथ मनमुटाव है। इस खतरे को देखते हुए एलएसी पर सेना तैनात किया गया है।

बता दें कि चीन की ओर से आज (बुधवार) सुबह चुशुल-मोल्दो पर कोर कमांडर स्तरीय बैठक का 14वां दौर चला। लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता भारतीय पक्ष का नेतृत्व कर रहे थे। भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में पिछले 20 महीने से चल रहे सैन्य गतिरोध को हल करने का प्रयास कर रहे हैं। बाचतीच का मुख्य फोकस हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र को हल करने पर था।

इससे पहले 13वें दौर की वार्ता 10 अक्टूबर को हुई थी। दोनों पक्ष बातचीत के बाद भारतीय सेना के साथ बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई थी। 14वें दौर की वार्ता पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर एक पुल बनाने के लिए भारत द्वारा चीन पर निशाना साधने के कुछ दिनों बाद ताजा बातचीत है। पुल उस इलाके में है जो करीब 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में है। साथ ही पिछले हफ्ते, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के चीन के नाम बदलने को हास्यापद कहा था। इस मामले में सेना की ओर से कहा गया था अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अंग रहा है और यह हमेशा रहेगा। 

गौर हो कि 18 नवंबर को दोनों देशों के राजनायिकों की बातचीत में भारत और चीन लद्दाख में जारी संघर्ष पर बातचीत के 14वें दौर के लिए राजी हुए थे।