अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में एक विशेष अदालत ने गुरुवार को एक नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में एक व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने चांगलांग जिले के खरसांग गांव के मूल निवासी एक मिकजान लोंगरी को पोस्को अधिनियम की धारा 06 के तहत नाबालिग पर 'Aggravated penetrative sexual assault" के लिए दोषी ठहराया है। 

घटना 2014 की है जब पीड़िता के पिता ने अपने तत्कालीन 12 साल के बच्चे को लोंगरी के साथ समखिडोंग गांव भेज दिया था।  पीड़िता के परिवार के रिश्तेदार लोंगरी (32) ने  बच्ची के साथ बलात्कार किया और उसे रात भर अपने घर में ही रखा। 

पीड़िता को गंभीर चोटें आईं और उसके प्राइवेट पार्ट से बहुत खून बह रहा था।  उसे बाद में इलाज के लिए असम के तिनसुकिया के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

पुरे मामले की जांच उप-निरीक्षक अजय कुमार ने की और अभियोजन विशेष लोक अभियोजक न्याजिंग हलांग द्वारा चलाई गई । लोंगरी एक बार कथित तौर पर मुकदमे के दौरान न्यायिक हिरासत से भागने में सफल हो गए थे  लेकिन बाद में उन्हें पकड़ लिया गया।

मुकदमे में खोंसा के विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) एच कश्यप ने लोंगरी को उसके अपराध के लिए दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उन्हें 20 हजार रुपये जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है।

खोंसा अदालत ने पीड़ित को पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करने के लिए मामले को चांगलांग जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास भेज दिया है।